हिंदू ज्योतिष शास्त्र में मंगल दोष को एक अत्यंत महत्वपूर्ण दोष माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह विशेष भावों में स्थित हो, तो उसे “मांगलिक” कहा जाता है। इस स्थिति को ही मंगल दोष कहते हैं।
मंगल दोष कब बनता है?
जन्म कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में मंगल ग्रह की स्थिति होने पर मंगल दोष बनता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन भावों में मंगल की उपस्थिति वैवाहिक जीवन, स्वास्थ्य और समृद्धि पर प्रभाव डाल सकती है।
मंगल दोष के प्रमुख लक्षण
- विवाह में बार-बार बाधा आना या उचित वर/वधू न मिलना
- वैवाहिक जीवन में कलह और अशांति
- व्यापार या नौकरी में अप्रत्याशित रुकावटें
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, विशेषतः रक्त संबंधी रोग
- जीवन में बार-बार दुर्घटनाएं या संकट
- क्रोध और आवेश का अधिक होना
क्या मंगल दोष से डरना चाहिए?
नहीं। मंगल दोष कोई अभिशाप नहीं है। यह केवल एक ग्रहीय स्थिति है जिसे उचित पूजा-पाठ और उपायों से शांत किया जा सकता है। उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में विधि-विधान से की गई मंगल दोष पूजा इस दोष के प्रभाव को कम करने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
मंगलनाथ मंदिर में पूजा क्यों करवाएं?
उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है। पुराणों के अनुसार मंगल देव का प्राकट्य यहीं हुआ था। इसलिए यहां की गई पूजा का फल अन्य स्थानों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहां मंगल दोष निवारण के लिए आते हैं।
यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है, तो घबराएं नहीं। पंडित कार्तिक पांडे जी के मार्गदर्शन में मंगलनाथ मंदिर में पूजा करवाएं और जीवन में सुख-शांति का अनुभव करें। आज ही संपर्क करें।